मारे गए कारसेवक मृतक तो हैं ही , सत्ता की क्रूरता से मारे गए । विफल व्यवस्था से मारे गए । किंतु घृणा और बीमार मानसिकता जब घर कर जाए तो काव्य में ऐसे बिम्ब का आना मुझे स्वाभाविक- सा लगता है । इस देश को जितनी नफ़रत की आग संघी लंपटों ने दी है वह किसी ने नहीं दिया
"कम्यूनिस्टों की छोड़िये
वे एक रेड लाइट एरिया की आबादी से अधिक कुछ नहीं
उनकी मज़बूरी कुछ भी रही हो
अब वे आत्मा बेचकर भी ख़ुश हैं"
शहीद की परिभाषा यदि कारसेवक होते तो भंवरसिंह मेघवंशी को 'मैं भी कारसेवक था' संभवतः लिखने की जरूरत नहीं पड़ती । वे शहीद तो नहीं थे । मूर्ख भी नहीं थे , कायर नहीं थे कि आतंकवादी नहीं थे मान भी लिया जाए तो वे बीजेपी के चालबाज कुचक्र में फंसे चुके भेड़ जरुर हुए ! वे विवेकहीन हो चुके लोग थे । कि निमित्त में यह हुआ
कोई उन्हें शहीद कहता है
कोई उन्हें मूर्ख कहता है
कोई उन्हें कायर कहता है
कोई उन्हें आतंकवादी कहता है
संविधान परिवर्तनशील है , कोई स्थायित्व या जड़ता का पर्याय नहीं है । किंतु संघी भक्तों के का माडल का कोई खिलौना नहीं है । देश एक राग है हर किसी को इससे प्यार है । बस हर कोई छिछौरा नहीं है । देश को जीना चाहते हैं । निहायत बेवकूफी थी कि
उन्हें लगता था
उनकी चिताओं पर लगेंगे मेले
लेकिन वतन पर मिटने वालों को
राष्ट्र पर मिटने वालों से अलग रखा जाता रहा है
सब्सिडी , सत्ता के हाथों की रखैल रही है तब भी और अब भी है इसलिए यह तर्कशील नहीं है कि
वे मुसलमान नहीं थे
इस दुर्भाग्य ने उनके परिजनों को
सब्सिडी, पेट्रोल पम्प और हज आदि से वंचित रखा
यह हमारा दुर्भाग्य है कि देश
टूट टूट कर
पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका बर्मा चीन अफ़ग़ानिस्तान कब के बन गए
और अब आसाम कश्मीर राजस्थान केरल तमिलनाडु मणिपुर मिजोरम आदि
दरक रहे हैं - तड़ तड़ तड़
चिंता हो , कि हम बचा सकें बचाएं देश न तोड़ें
मारे गए कारसेवकों के बारे में
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कोई उन्हें शहीद कहता है
कोई उन्हें मूर्ख कहता है
कोई उन्हें कायर कहता है
कोई उन्हें आतंकवादी कहता है
उनके परिजन
उन्हें जिस गर्व से याद करते हैं
संविधान कहता है
इस तरह से उनकी याद
संविधान की मूल भावना की व्युत्क्रमानुपाती है
उन्हें लगता था
उनकी चिताओं पर लगेंगे मेले
लेकिन वतन पर मिटने वालों को
राष्ट्र पर मिटने वालों से अलग रखा जाता रहा है
वे मुसलमान नहीं थे
इस दुर्भाग्य ने उनके परिजनों को
सब्सिडी, पेट्रोल पम्प और हज आदि से वंचित रखा
- यह कोई दुख की बात नहीं -
- गर्व की भी नहीं यद्यपि -
वे अब भी याद किये जाते हैं
उन्हें याद करने वाले
अब भी अखंड भारत में रह रहे हैं
जबकि अखंड भारत में रहने वालों से
टूट टूट कर
पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका बर्मा चीन अफ़ग़ानिस्तान कब के बन गए
और अब आसाम कश्मीर राजस्थान केरल तमिलनाडु मणिपुर मिजोरम आदि
दरक रहे हैं - तड़ तड़ तड़
कारसेवक
बीजेपी के शासनकाल में शहीद हैं
और कांग्रेस के शासनकाल में
वे ऐसे हैं जैसे हैं ही नहीं
कम्यूनिस्टों की छोड़िये
वे एक रेड लाइट एरिया की आबादी से अधिक कुछ नहीं
उनकी मज़बूरी कुछ भी रही हो
अब वे आत्मा बेचकर भी ख़ुश हैं
एक नाम चमक रहा है कल से : कारसेवक जगदीश का
जिसकी बेटी अब प्राइमरी टीचर है
वह अपनी स्कूल में गवाती है राष्ट्रगान
उसे समझ नहीं आता
कभी उसके होठों पर
एक टेढ़ी हँसी क्यों दौड़ जाती है?
कभी उसकी आँखें क्यों भीग जाती है?
जब वह सबसे जोर से गाती है
राष्ट्रगान का अंतिम पद -
जय जय जय जय हे!
क्या कोई गारंटी से कह सकता है-
अयोध्या के नए राम मंदिर में
बाबरी के मलबे की
एक भी ईंट शामिल नहीं है?
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मन मीत