Sunday, July 26, 2020

कविता

भाववादी विचार , रिक्त सौन्दर्य बोध अथवा रूझान एक कयिता को यथार्थ से विमुख करते हैं । पूंजी के इस संदिग्ध , कलावादी चेहरे से दूर एक सजग कवि हमेशा ही अपना अलग अस्तित्व गढ़ता है ।

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