Saturday, July 11, 2020

कबीर


कबीर में जो दृष्टि है वह स्वप्नजीविता से कहीं ज्यादा स्वप्नदृष्टा का है । एक संपूर्ण यथार्थवाद उनमें समाहित है । जीवन और दर्शन का अद्भुत सामंजस्य है कबीर के यहां । यकीनन हिन्दी के सबसे पहले और बड़े प्रतिरोधी कवि हैं कबीर । जो सम्पूर्ण समाजिक और तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था पर तेज प्रहार करते गए ।

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