Tuesday, December 1, 2020

तगड़ा कवि

कविता में दम है तो , यह मायने ही नहीं रखता कि उसे किसने लिखा ! पर इस कविता में आए भाव व विचार उस कवि के प्रति मुझे कृतज्ञ बना जाता है । अमूमन हिंदी कविता में वैचारिक आग्रह की कविताएं चुनौती की कविताएं रही है , प्रतिवादी कविताएं हुई  । जो अपने साहस व सामर्थ्य से हिंदी को एक विजन तक ले जाती रही है । इस कवि की कविता भी उसी बड़े विजन का भाग है । उसी का ही एक विस्तृत फलक है । कवि के चैलेंजिग साहस को देख लगता है कवि जरुर कोई तगड़ा कवि होगा । हाल फिलहाल दिल्ली में डटे हुए साथियों का आदर करते  और शहीद किसान भाई को श्रद्धांजलि देते , इस कवि को पढ़ें ,गुनें  ; उस तगड़ा कवि की हिमाकत देखें.   

आलोक धन्वा Madan Kashyap 

          मैं किसान हूँ
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आसमान में धान बो रहा हूँ
कुछ लोग कह रहे हैं
कि पगले! आसमान में धान नहीं जमा करता
मैं कहता हूँ पगले!
अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है
तो आसमान में धान भी जम सकता है
और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा
या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा
या आसमान में धान जमेगा।

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