Tuesday, August 18, 2020

पंकज चतुर्वेदी अटल प्रकरण

"अटल जी निश्चय ही प्रमुख तौर पर उत्तर भारतीय उच्च-मध्यवर्गीय भद्रलोक की इस मरीचिका के प्रतिनिधि राजपुरुष थे कि सरेआम फ़ासिस्ट हुए बग़ैर भी दक्षिणपंथी हुआ जा सकता है। मगर यह मरीचिका अब ध्वस्त हो चुकी है। परदा गिर गया है। दक्षिणपंथ का नग्न और बर्बर फ़ासीवादी संस्करण हमारे सामने है ।  

(पंकज को समझने के लिए उसकी कविता के भीतर तक जाना होगा ; मूर्खतापूर्ण असहमति से चीज़े दुरस्त नहीं की जा सकती )

"स्मृति में 
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फ़ासीवाद के 
सुघड़ शिल्पकार की 
स्मृति में 
बर्बर सब दुखी हैं 
संगठित और कृतज्ञ

जानते हैं कि शुरूआत में 
उसी नाटकीय 
शालीनता की बदौलत 
वे स्वीकार्य हुए 
और अब 
शीर्ष पर क़ाबिज़ हैं"

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